FB 2812 - वचनैरसतां महीयसो न खलु व्येति गुरुत्वमुद्धतैः । किमपैति रजोभिरौर्वरैरवकीर्णस्य मणेर्महार्घता ।। (शिशुपालवधम्,१६.२७) अर्थात् दुर्जनों के वचन से सज्जनों का गौरव कम नहीं होता। पृथ्वी की धूलि से ढके हुए रत्न की बहुमूल्यता कभी नष्ट नहीं होती ।

An enigmatic superstar | The Shahenshah of Bollywood

FB 2812 - वचनैरसतां महीयसो न खलु व्येति गुरुत्वमुद्धतैः । किमपैति रजोभिरौर्वरैरवकीर्णस्य मणेर्महार्घता ।। (शिशुपालवधम्,१६.२७) अर्थात् दुर्जनों के वचन से सज्जनों का गौरव कम नहीं होता। पृथ्वी की धूलि से ढके हुए रत्न की बहुमूल्यता कभी नष्ट नहीं होती ।

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