FB 2616 - बाबूजी की माँ ने कहा था : "दिन भर में एक बार , सरस्वती स्वयं मनुष्य की जिह्वा पर बैठकर बोलती हैं " बाबूजी ने लिखा था अपनी पहली पुस्तक छपने पर : 'उसकी इतनी आलोचना हुई उसे आज मैं अतिशयोत्ति कहूँगा ; कवि को निश्चय प्रोत्साहन मिला था, उससे । विश्वास को भी प्रोत्साहन चाहिए'

An enigmatic superstar | The Shahenshah of Bollywood

Amitabh Bachchan, An enigmatic superstar | The Shahenshah of Bollywood

FB 2616 -
बाबूजी की माँ ने कहा था :
"दिन भर में एक बार , सरस्वती स्वयं मनुष्य की जिह्वा पर बैठकर बोलती हैं "

बाबूजी ने लिखा था अपनी पहली पुस्तक छपने पर :
'उसकी इतनी आलोचना हुई उसे आज मैं अतिशयोत्ति कहूँगा ; कवि को निश्चय प्रोत्साहन मिला था, उससे । विश्वास को भी प्रोत्साहन चाहिए'

FB 2616 - बाबूजी की माँ ने कहा था : "दिन भर में एक बार , सरस्वती स्वयं मनुष्य की जिह्वा पर बैठकर बोलती हैं " बाबूजी ने लिखा था अपनी पहली पुस्तक छपने पर : 'उसकी इतनी आलोचना हुई उसे आज मैं अतिशयोत्ति कहूँगा ; कवि को निश्चय प्रोत्साहन मिला था, उससे । विश्वास को भी प्रोत्साहन चाहिए'

Let's Connect

sm2p0