FB 2562 - " हिन्दी दिवस " दिवस के उपलक्ष में हमारे Ef V ने ये लिखा : हिन्दी संवैधानिक रूप से भारत की प्रथम राजभाषा और भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। चीनी के बाद यह विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा भी है। हिन्दी और इसकी बोलियाँ उत्तर एवं मध्य भारत के विविध राज्यों में बोली जाती हैं। भारत और अन्य देशों में ६० करोड़ से अधिक लोग हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं। फ़िजी, मॉरिशस, गयाना, सूरीनाम की अधिकतर और नेपाल की कुछ जनता हिन्दी बोलती है। हिन्दी राष्ट्रभाषा, राजभाषा, सम्पर्क भाषा, जनभाषा के सोपानों को पार कर विश्वभाषा बनने की ओर अग्रसर है। भाषा विकास क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी हिन्दी प्रेमियों के लिए बड़ी सन्तोषजनक है कि आने वाले समय में विश्वस्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व की जो चन्द भाषाएँ होंगी उनमें हिन्दी भी प्रमुख होगी। हिन्दी एक वैज्ञानिक भाषा है और कोई भी अक्षर वैसा क्यूँ है, उसके पीछे कुछ कारण है, अंग्रेजी भाषा में ये बात देखने में नहीं आती | क, ख, ग, घ, ङ- कंठव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय ध्वनि कंठ से निकलती है। एक बार बोल कर देखिये | च, छ, ज, झ,ञ- तालव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ तालू से लगती है। एक बार बोल कर देखिये | ट, ठ, ड, ढ , ण- मूर्धन्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण जीभ के मूर्धा से लगने पर ही सम्भव है। एक बार बोल कर देखिये | त, थ, द, ध, न- दंतीय कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ दांतों से लगती है। एक बार बोल कर देखिये | प, फ, ब, भ, म,- ओष्ठ्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण ओठों के मिलने पर ही होता है। एक बार बोल कर देखिये । हम अपनी भाषा पर गर्व करते हैं ये सही है परन्तु लोगो को इसका कारण भी बताईये | इतनी वैज्ञानिकता दुनिया की किसी भाषा मे नही है जय हिन्द " क,ख,ग क्या कहता है जरा गौर करें.... •••••••••••••••••••••••••••••••••••• क - क्लेश मत करो ख- खराब मत करो ग- गर्व ना करो घ- घमण्ड मत करो च- चिँता मत करो छ- छल-कपट मत करो ज- जवाबदारी निभाओ झ- झूठ मत बोलो ट- टिप्पणी मत करो ठ- ठगो मत ड- डरपोक मत बनो ढ- ढोंग ना करो त- तैश मे मत रहो थ- थको मत द- दिलदार बनो ध- धोखा मत करो न- नम्र बनो प- पाप मत करो फ- फालतू काम मत करो ब- बिगाङ मत करो भ- भावुक बनो म- मधुर बनो य- यशश्वी बनो र- रोओ मत ल- लोभ मत करो व- वैर मत करो श- शत्रुता मत करो ष- षटकोण की तरह स्थिर रहो स- सच बोलो ह- हँसमुख रहो क्ष- क्षमा करो त्र- त्रास मत करो ज्ञ- ज्ञानी बनो !! Ef ~ Ef Vb

An enigmatic superstar | The Shahenshah of Bollywood

FB 2562 - " हिन्दी दिवस " दिवस के उपलक्ष में हमारे Ef V ने ये लिखा : हिन्दी संवैधानिक रूप से भारत की प्रथम राजभाषा और भारत की सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा है। चीनी के बाद यह विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा भी है। हिन्दी और इसकी बोलियाँ उत्तर एवं मध्य भारत के विविध राज्यों में बोली जाती हैं। भारत और अन्य देशों में ६० करोड़ से अधिक लोग हिन्दी बोलते, पढ़ते और लिखते हैं। फ़िजी, मॉरिशस, गयाना, सूरीनाम की अधिकतर और नेपाल की कुछ जनता हिन्दी बोलती है। हिन्दी राष्ट्रभाषा, राजभाषा, सम्पर्क भाषा, जनभाषा के सोपानों को पार कर विश्वभाषा बनने की ओर अग्रसर है। भाषा विकास क्षेत्र से जुड़े वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी हिन्दी प्रेमियों के लिए बड़ी सन्तोषजनक है कि आने वाले समय में विश्वस्तर पर अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व की जो चन्द भाषाएँ होंगी उनमें हिन्दी भी प्रमुख होगी। हिन्दी एक वैज्ञानिक भाषा है और कोई भी अक्षर वैसा क्यूँ है, उसके पीछे कुछ कारण है, अंग्रेजी भाषा में ये बात देखने में नहीं आती | क, ख, ग, घ, ङ- कंठव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय ध्वनि कंठ से निकलती है। एक बार बोल कर देखिये | च, छ, ज, झ,ञ- तालव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ तालू से लगती है। एक बार बोल कर देखिये | ट, ठ, ड, ढ , ण- मूर्धन्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण जीभ के मूर्धा से लगने पर ही सम्भव है। एक बार बोल कर देखिये | त, थ, द, ध, न- दंतीय कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ दांतों से लगती है। एक बार बोल कर देखिये | प, फ, ब, भ, म,- ओष्ठ्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण ओठों के मिलने पर ही होता है। एक बार बोल कर देखिये । हम अपनी भाषा पर गर्व करते हैं ये सही है परन्तु लोगो को इसका कारण भी बताईये | इतनी वैज्ञानिकता दुनिया की किसी भाषा मे नही है जय हिन्द " क,ख,ग क्या कहता है जरा गौर करें.... •••••••••••••••••••••••••••••••••••• क - क्लेश मत करो ख- खराब मत करो ग- गर्व ना करो घ- घमण्ड मत करो च- चिँता मत करो छ- छल-कपट मत करो ज- जवाबदारी निभाओ झ- झूठ मत बोलो ट- टिप्पणी मत करो ठ- ठगो मत ड- डरपोक मत बनो ढ- ढोंग ना करो त- तैश मे मत रहो थ- थको मत द- दिलदार बनो ध- धोखा मत करो न- नम्र बनो प- पाप मत करो फ- फालतू काम मत करो ब- बिगाङ मत करो भ- भावुक बनो म- मधुर बनो य- यशश्वी बनो र- रोओ मत ल- लोभ मत करो व- वैर मत करो श- शत्रुता मत करो ष- षटकोण की तरह स्थिर रहो स- सच बोलो ह- हँसमुख रहो क्ष- क्षमा करो त्र- त्रास मत करो ज्ञ- ज्ञानी बनो !! Ef ~ Ef Vb

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