FB 2359 - ' हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली। कुछ यादें मेरे संग पांव पांव चली। सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ। वो जिंदगी ही क्या जो छाँव छाँव चली।।....' ~ Ef SA 🙏

An enigmatic superstar | The Shahenshah of Bollywood

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