FB 2232 - मिट्टी दीन कितनी, हाय! हृदय की ज्‍वाला जलाती, अश्रु की धारा बहाती, और उर-उच्‍छ्वास में यह काँपती निरुपाय! मिट्टी दीन कितनी, हाय! शून्‍यता एकांत मन की, शून्‍यता जैसे गगन की, थाह पाती है न इसका मृत्तिका असहाय! मिट्टी दीन कितनी, हाय! वह किसे दोषी बताए, और किसको दुख सुनाए, जब कि मिट्टी साथ मिट्टी के करे अन्‍याय! मिट्टी दीन कितनी, हाय! ~ डॉ. हरिवंशराय बच्चन

An enigmatic superstar | The Shahenshah of Bollywood

FB 2232 - मिट्टी दीन कितनी, हाय! हृदय की ज्‍वाला जलाती, अश्रु की धारा बहाती, और उर-उच्‍छ्वास में यह काँपती निरुपाय! मिट्टी दीन कितनी, हाय! शून्‍यता एकांत मन की, शून्‍यता जैसे गगन की, थाह पाती है न इसका मृत्तिका असहाय! मिट्टी दीन कितनी, हाय! वह किसे दोषी बताए, और किसको दुख सुनाए, जब कि मिट्टी साथ मिट्टी के करे अन्‍याय! मिट्टी दीन कितनी, हाय! ~ डॉ. हरिवंशराय बच्चन

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