FB 2199 - ये जन समूह , प्रति इतवार को , jalsa, मेरे निवास स्थान के द्वार पर - और पूज्य बाबूजी की कुछ पंक्तियाँ याद आ गईं : " जीवन की आपाधापी में कब वक़्त मिला , कुछ देर कहीं पर बैठ कभी ये सोच सकूँ , जो किया कहा माना उसमें क्या बुरा भला ; जिस दिन मेरी चेतना जगी मैंने देखा मैं खड़ा हुआ हूँ इस दुनिया के मेले में , हर एक यहाँ पर एक भुलावे में भूला , हर एक लगा है , अपनी अपनी दे ले में " कुछ देर रहा हक्का बक्का भौंचक्का सा ; आ गया कहाँ क्या करूँ यहाँ , जाऊँ किस जाँ ; फिर एक तरफ़ से आया ही तो धक्का सा , मैंने भी बहना शुरू किया इस रेले में " ~ बच्चन

An enigmatic superstar | The Shahenshah of Bollywood

Amitabh Bachchan, An enigmatic superstar | The Shahenshah of Bollywood

FB 2199 - ये जन समूह , प्रति इतवार को , jalsa, मेरे निवास स्थान के द्वार पर -
और पूज्य बाबूजी की कुछ पंक्तियाँ याद आ गईं :

" जीवन की आपाधापी में कब वक़्त मिला , कुछ देर कहीं पर बैठ कभी ये सोच सकूँ ,
जो किया कहा माना उसमें क्या बुरा भला ;
जिस दिन मेरी चेतना जगी मैंने देखा मैं खड़ा हुआ हूँ इस दुनिया के मेले में ,
हर एक यहाँ पर एक भुलावे में भूला , हर एक लगा है , अपनी अपनी दे ले में "
कुछ देर रहा हक्का बक्का भौंचक्का सा ; आ गया कहाँ क्या करूँ यहाँ , जाऊँ किस जाँ ;
फिर एक तरफ़ से आया ही तो धक्का सा , मैंने भी बहना शुरू किया इस रेले में "
~ बच्चन

FB 2199 - ये जन समूह , प्रति इतवार को , jalsa, मेरे निवास स्थान के द्वार पर - और पूज्य बाबूजी की कुछ पंक्तियाँ याद आ गईं : " जीवन की आपाधापी में कब वक़्त मिला , कुछ देर कहीं पर बैठ कभी ये सोच सकूँ , जो किया कहा माना उसमें क्या बुरा भला ; जिस दिन मेरी चेतना जगी मैंने देखा मैं खड़ा हुआ हूँ इस दुनिया के मेले में , हर एक यहाँ पर एक भुलावे में भूला , हर एक लगा है , अपनी अपनी दे ले में " कुछ देर रहा हक्का बक्का भौंचक्का सा ; आ गया कहाँ क्या करूँ यहाँ , जाऊँ किस जाँ ; फिर एक तरफ़ से आया ही तो धक्का सा , मैंने भी बहना शुरू किया इस रेले में " ~ बच्चन

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