FB 1899 - पूज्य बाबूजी ने 'मधुशाला' रची थी १९३३ 1933 में , आज उसे पढ़ते समय उनका पहला सम्बोधन जो था, उसमें से मुझे जो अच्छा लगा , यहाँ post कर रहा हूँ "भक्त, भगवान के चरणो में कोई भेंट, उनकी प्रसन्नता के विचार से नहीं चढ़ाता । दीन - हीन , अकिंचन भक्त , ये विचार ही कब अपने मन में ला सकता है , की वो भगवान के चरणों में कोई ऐसी वस्तु उपस्थित कर सकता है , जिससे वो प्रसन्न हो सकें । वो तो भगवान के चरणों में अपनी भेंट , अपने हृदय की संतुष्टि के लिए ही चढ़ाता है । भगवान के चरणों में वो कुछ अपना रखकर अपने ही हृदय का भार हल्का करता है - वो बोझ उतारता है ।"🙏🙏🙏🙏🙏 ~ हरिवंश राय बच्चन

An enigmatic superstar | The Shahenshah of Bollywood

Amitabh Bachchan, An enigmatic superstar | The Shahenshah of Bollywood

FB 1899 - पूज्य बाबूजी ने 'मधुशाला' रची थी १९३३ 1933 में , आज उसे पढ़ते समय उनका पहला सम्बोधन जो था, उसमें से मुझे जो अच्छा लगा , यहाँ post कर रहा हूँ

"भक्त, भगवान के चरणो में कोई भेंट, उनकी प्रसन्नता के विचार से नहीं चढ़ाता । दीन - हीन , अकिंचन भक्त , ये विचार ही कब अपने मन में ला सकता है , की वो भगवान के चरणों में कोई ऐसी वस्तु उपस्थित कर सकता है , जिससे वो प्रसन्न हो सकें । वो तो भगवान के चरणों में अपनी भेंट , अपने हृदय की संतुष्टि के लिए ही चढ़ाता है । भगवान के चरणों में वो कुछ अपना रखकर अपने ही हृदय का भार हल्का करता है - वो बोझ उतारता है ।"🙏🙏🙏🙏🙏

~ हरिवंश राय बच्चन

FB 1899 - पूज्य बाबूजी ने 'मधुशाला' रची थी १९३३ 1933 में , आज उसे पढ़ते समय उनका पहला सम्बोधन जो था, उसमें से मुझे जो अच्छा लगा , यहाँ post कर रहा हूँ "भक्त, भगवान के चरणो में कोई भेंट, उनकी प्रसन्नता के विचार से नहीं चढ़ाता । दीन - हीन , अकिंचन भक्त , ये विचार ही कब अपने मन में ला सकता है , की वो भगवान के चरणों में कोई ऐसी वस्तु उपस्थित कर सकता है , जिससे वो प्रसन्न हो सकें । वो तो भगवान के चरणों में अपनी भेंट , अपने हृदय की संतुष्टि के लिए ही चढ़ाता है । भगवान के चरणों में वो कुछ अपना रखकर अपने ही हृदय का भार हल्का करता है - वो बोझ उतारता है ।"🙏🙏🙏🙏🙏 ~ हरिवंश राय बच्चन

Let's Connect

sm2p0